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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने असम के नागांव में लखपति दीदियों से संवाद किया

केंद्रीय ग्रामीण विकास व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने पूर्वोत्तर दौरे के तीसरे और अंतिम दिन असम, नागांव जिले के भेलुगुड़ी में स्वयं सहायता समूहों की लखपति दीदियों से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने लखपति दीदियों से संवाद किया, अनुभव साझा किए और सशक्तिकरण की प्रेरक कहानियाँ सुनीं।

चौहान ने कहा कि नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद दूंगा, असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत जी को भी धन्यवाद दूंगा कि उनके मार्गदर्शन में असम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का काम बहुत अच्छा चल रहा।

चौहान ने कहा कि आगे हमारा संकल्प है कि हर गरीब परिवार की बहन स्वयं सहायता समूह से जुड़े। अलग-अलग व्यवसाय के जरिए जीविकोपार्जन करें। असम में तो असीम क्षमता है। यहां के लोकल उत्पाद, हल्दी से लेकर मिर्ची तक हर उत्पाद को प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के जरिए बढ़ाकर स्वावलंबन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की जा सकती है। यहां कि महिलाएं इस दिशा में तेजी से बढ़ भी रही हैं, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का ‘लोकल फॉल वोकल’ विजन सार्थक हो रहा है।

चौहान ने कहा कि कल मैं काजीरंगा में था। वहाँ अदरक की प्रोसेसिंग का काम देखा, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी देखी। मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि प्रसन्नता कि बात है कि कई लखपति दीदियों की आमदनी यहां 10 लाख रुपये सालाना तक पहुंच गई है। मैं आपको हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूँ। यहां मिलियन दीदी मिल गई जो एक साल में 10 लाख रुपए कमा रही हैं।

अंत में श्री चौहान ने कहा कि उचित प्रशिक्षण और बैंक लिंकेज के कारण 8 लाख 50 हजार दीदियाँ असम में लखपति दीदी बन गई हैं और जो अन्य 33 लाख बहनें, स्वयं सहायता समूहों में काम कर रही हैं, उन्हें भी जल्द ही लखपति दीदी बनाने की दिशा में युद्धस्तर पर प्रयास

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संस्कृति मंत्रालय ने “एक देश एक धड़कन” के माध्यम से राष्ट्रवाद के प्रति उत्साह जगाया

देशभक्ति की अमर भावना को भावभीनी श्रद्धांजलि देने और राष्ट्र के वीरों को सम्मानित करने के लिए, संस्कृति मंत्रालय ने एक शक्तिशाली और बाध्यकारी पहल “एक देश, एक धड़कन” शुरू की है।

राष्ट्रीय गौरव की साझा लय में राष्ट्र को एकजुट करने के लिए तैयार किया गया यह अभियान पहले से ही पूरे भारत में नागरिकों के बीच मजबूती से गूंज रहा है। #एकदेशएकधड़कन (#OneNationOneHeartbeat) का नारा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है, जो एकता, देशभक्ति के जोश और तिरंगे के प्रति श्रद्धा की भावना को बढ़ाता है।

यह एक कृतज्ञ राष्ट्र की सामूहिक भावना का प्रतीक है। इसके माध्यम से हम अपने गुमनाम नायकों और बहादुरों की वीरता और बलिदान को सलाम करते हैं।

समन्वित राष्ट्रीय भागीदारी

पिछले 48 घंटों में, संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में सभी 43 संस्थानों ने एकजुट होकर और उत्साह के साथ भागीदारी की है।

  • हमें एक साथ बांधने वाली इस भागीदारी से सशस्त्र बलों और बहादुरों को सलाम करने के साथ-साथ तिरंगे की भावना व्यक्त की जाती है. साथ ही, सभी संस्थानों ने अपने प्रदर्शन चित्रों (डीपी) को तिरंगे में बदल दिया है।

एएसआई स्मारकों को ध्वज के रंगों में रोशन किया गया

प्रमुख सांस्कृतिक संस्थानों और विरासत स्थलों को भारतीय ध्वज के रंगों में रोशन किया गया है। इनमें शामिल हैं:

• विक्टोरिया मेमोरियल (पश्चिम बंगाल), सालारजंग संग्रहालय (आंध्र प्रदेश), एनजीएमए दिल्ली और क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र, लखनऊ।

• भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने भी अपनी प्रतिष्ठित इमारत को रोशन करके इसमें शामिल किया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की देखरेख में, देश भर में 60 से अधिक विरासत स्मारकों को तिरंगे से रोशन किया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • दिल्ली में लाल किला, किला राय पिथौरा, सफदरजंग मकबरा और पुराना किला।
  • राजस्थान में कुंभलगढ़, चित्तौड़गढ़ और किला घंटा। गुलाब बाड़ी, उत्तर प्रदेश
  • उदयगिरि गुफाएं (ओडिशा), अशोक स्तंभ (बिहार), राहतगढ़ किला (मध्य प्रदेश) और किला बल्लारपुर (महाराष्ट्र), अन्य।
  • रंग घर (असम), चित्रदुर्ग किला (कर्नाटक), लेह पैलेस (लेह)

एकता और स्मरण के एक मार्मिक संकेत के रूप में, संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 14 मई 2025 को कुतुब मीनार का दौरा किया, जहां तिरंगे का एक विशेष प्रक्षेपण मानचित्रण प्रदर्शित किया गया। केंद्रीय मंत्री ने सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और हमारे गुमनाम नायकों और बहादुरों के साहस एवं वीरता से प्रज्वलित राष्ट्रवादी भावना को सलाम किया।

सभी भारतीयों के लिए गौरव के इस क्षण को सामूहिक रूप से मनाने के उद्देश्य से, एमओसी के तहत संस्थान और संगठन विशेष कहानी सुनाने (स्टोरी टेलिंग) के कार्यक्रम, चित्रकारी के माध्यम से श्रद्धांजलि, विशेष प्रदर्शनियां, संगीतमय श्रद्धांजलि, प्रश्नोत्तरी, बैज/कलाईबैंड वितरण, जन भागीदारी के साथ तिरंगा रैलियां जैसे कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं।

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आईआईसीए और डीजीआर ने वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ स्वतंत्र निदेशक के लिए दूसरा प्रमाणन कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया

  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने डायरेक्टरेट जनरल रीसेटलमेंट (डीजीआर) के साथ 5 मई 2025 से 16 मई 2025 तक गुरुग्राम के मानेसर स्थित आईआईसीए कैंपस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ कार्यक्रम का दूसरा बैच संचालित किया।

सभी तीनों सेवाओं से एयर मार्शल, वाइस एडमिरल, रियर एडमिरल, एयर वाइस मार्शल, मेजर जनरल, ब्रिगेडियर, कर्नल और ग्रुप कैप्टन श्रेणियों के कुल 30 वरिष्ठ अधिकारियों ने द्वि साप्ताहिक प्रमाणन कार्यक्रम में प्रतिनिधित्व किया।

समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईसीए के डीजी एवं सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने की। समापन कार्यक्रम को लेफ्टिनेंट जनरल एसबीके सिंह, एसएम, डायरेक्टर जनरल, डीजीआर एंड वाइस एडमिरल राजाराम स्वामीनाथन ने भी संबोधित किया, जिसमें उन्होंने सशस्त्र बलों और कॉरपोरेट जगत में होने वाले अनुभवों के बीच समानताएं बताईं। उन्होंने आगे रेखांकित किया कि कॉरपोरेट में सुशासन के लिए आवश्यक शर्तें- नैतिकता और अखंडता, सशस्त्र बलों में पहले से ही मौजूद हैं, और नई स्किल्स, जानकारी और अनुभवों को साथ लेकर बदलते भारतीय कॉरपोरेट परिदृश्य में परिवर्तनकर्ता के तौर पर स्थापित करती हैं।

आईआईसीए के डीजी एवं सीईओ  ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने उभरते भारतीय कॉरपोरेट परिदृश्य में अनुभवी लोगों की ओर से निभाई जाने वाली अपेक्षित भूमिकाओं के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में विशेष प्रकार के क्षेत्रों में सशस्त्र बलों की ओर से अधिक क्षमता और उत्पादन पर जोर दिया और रेखांकित किया कि किस प्रकार से यह अनुभवी लोगों का यह अनुभव भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र का हिस्सा रहते हुए राष्ट्र निर्माण के योग्य बनाएगा। श्री सिंह ने अपने विचार को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सशस्त्र बलों की ओर से मिली दक्षता का इस्तेमाल, उन अनुभवों में इस्तेमाल होने वाले क्षेत्रों में किया जाना चाहिए, जो अंततः विकसित भारत की उपलब्धि का नेतृत्व करेगा। कार्यक्रम के प्रतिभागियों को दिए गए संबोधन में श्री सिंह ने एक विशेष पहलू को कवर करते हुए प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास पर ध्यान केंद्रित करने को कहा, जो आगे जाकर रोजगार निर्माण करेगा, जो न केवल दिग्गज साथियों के लिए है, बल्कि बड़े स्तर पर पूरे राष्ट्र के लिए है, जो एमएसएमई क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा।

आईआईसीए में कॉरपोरेट गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी स्कूल के हेड डॉ. नीरज गुप्त ने अपने संबोधन के दौरान सर्वाधिक महत्वपूर्ण हालातों के बावजूद पूरे कार्यक्रम में प्रतिभागियों की उपस्थिति बनाए रखने पर धन्यवाद किया। उन्होंने सार्वजनिक शासन, सैन्य शासन और कॉरपोरेट शासन के विचारों के बीच कन्वर्जेंस और डाइवर्जेंस प्वाइंट्स पर जोर दिया। उन्होंने जोर दिया कि द्वि साप्ताहिक कार्यक्रम का उद्देश्य: (i) प्रतिभागियों को कॉरपोरेट प्रशासन की नियामक समझ और विचारों को समझाना, (ii) स्वतंत्र डायरेक्टर की भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में बताना और, (iii) कॉरपोरेट बोर्ड में योगदान देने में मदद करना था।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रमाणन कार्यक्रम को आईआईसीए में प्रधान रिसर्च असोसिएट डॉ. अनिंदिता चक्रवर्ती और आईआईसीए में वरिष्ठ रिसर्च असोसिएट सीएस आशीष कुमार ने पूरा किया। कॉरपोरेट मामलों पर जानकारी के भंडार, मंत्रालय, कॉरपोरेट और अन्य इकाइयों जैसे नियामकों के साथ नियामक फ्रेमवर्क पर काम करने वाले आईआईसीए ने एक उत्प्रेरक के तौर पर अपनी भूमिका निभाई।  संस्थान हमेशा से ही सुशासन के प्रचार और जिम्मेदार व्यापार आचरण से जुड़ी पहलों में अग्रणी रहा है।

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पीएम-जनमन सम्पूर्णता अभियान

 
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव विभु नायर ने आवश्यक सेवाओं के संचालन और प्रभावी वितरण पर विशेष ध्यान देने के साथ पीएम-जनमन के तहत विभिन्न पहलों को फिजिकल रूप से पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। नायर ने कहा कि राज्य अपनी-अपनी योजनाओं का उपयोग जहां भी संभव हो, इन पहलों को समर्थन देने और उन्हें प्राप्त करने के लिए करें तथा सभी पहलों के लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किये जाने चाहिए। आज नई दिल्ली में पीएम-जनमन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पीएम-जनमन के कार्यान्वयन के सभी स्तरों पर शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रत्येक माह के अंतराल पर ऐसी समीक्षा आयोजित की जाएगी।

एक दिवसीय समीक्षा बैठक के दौरान, अभियान के अंतर्गत बुनियादी ढांचे (व्यक्तिगत और सामुदायिक परिसंपत्तियों) के तेजी से और मिशन मोड में पूरा होने से संबंधित प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की गई, जिसमें सेवा सम्पूर्णता को प्राप्त करने के लिए सभी प्रयासों में सामंजस्य स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने संभावित कार्यान्वयन बाधाओं की पहचान करने और उनका समाधान करने के लिए विचार-मंथन सत्रों में भाग लिया। यह भी देखा गया कि समय पर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के भीतर कई स्तरों पर एक व्यवस्थित और नियमित समीक्षा तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए और विभागों के बीच समन्वय को गांव स्तर तक दोहराया जाना चाहिए।

चर्चा के मुख्य बिन्दु इस बात पर केंद्रित थे कि सभी गांवों में अभियान के तहत रेखांकित पहलों का पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

  • स्वास्थ्य, आंगनवाड़ी और कौशल विकास की आवश्यक सेवाओं के साथ बहुउद्देश्यीय केंद्रों (एमपीसी) का निर्माण पूरा करना और उनका संचालन शुरू करना।
  • सभी वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके) में व्यावसायिक गतिविधियों की शुरुआत
  • पक्के मकानों की स्वीकृति और निर्माण का फिजिकल कार्य पूरा करना तथा आधार जैसे आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • बस्तियों के स्थान के अनुसार सड़कों की सफाई और चल रही सड़क परियोजनाओं को समय पर पूरा करना
  • सभी आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) का संचालन और निगरानी
  • जीपीएस जैसे तकनीकी उपकरणों के उपयोग से मोबाइल मेडिकल यूनिटों (एमएमयू) के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को मजबूत करना।
  • लक्षित संख्या में पीवीटीजी छात्रावासों की स्वीकृति और निर्माण
  • ऑन-ग्रिड या ऑफ-ग्रिड समाधानों के माध्यम से पीवीटीजी घरों का विद्युतीकरण
  • नल जल आपूर्ति द्वारा गांवों का सम्पूर्ण कवरेज
  • दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए मोबाइल टावरों की स्थापना

प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) योजना के सम्पूर्णता स्तरों का आकलन करने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में इस समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इसमें पीएम-जनमन मिशन में भाग लेने वाले 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव/सचिव स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में भाग लेने वाले मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल हुए।

प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के व्यापक विकास और कल्याण को सुनिश्चित करना है। 2023 में जनजातीय गौरव दिवस पर माननीय प्रधानमंत्री द्वारा घोषित यह अभियान देश में सबसे अधिक वंचित समुदायों के लिए समावेशी विकास और सामाजिक न्याय के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है जो विकसित गांवविकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता करेगा।

अभियान को राज्य सरकारों के सहयोग से 9 मंत्रालयों और विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। इससे संबंधित फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरा करने और समयबद्ध तरीके से सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रित, मिशन-मोड दृष्टिकोण अपनाया गया है।

 

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डाक विभाग ने कोडईकनाल सौर वेधशाला की 125वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया

डाक विभाग को कोडईकनाल सौर वेधशाला (केएसओ) के 125वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी करने पर गर्व है। इस विशेष टिकट के माध्यम से केएसओ की विरासत को मान्यता देना भारत के सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संस्थानों में से एक का उपयुक्त सम्मान है और यह वैश्विक स्तर पर विज्ञान जगत में देश के दीर्घकालिक योगदान को रेखांकित करता है।

इस स्मारक डाक टिकट का विमोचन कर्नाटक सर्कल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल श्री एस. राजेंद्र कुमार द्वारा बेंगलुरु स्थित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान में आईआईए के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष एवं इसरो के पूर्व अध्यक्ष श्री ए.एस. किरण कुमार तथा अन्य सम्मानित अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।

स्मारक डाक टिकट का विमोचन

मिलनाडु के पलानी हिल्स में स्थित तथा 1 अप्रैल 1899 को स्थापित कोडईकनाल सौर वेधशाला (केएसओ) एक सदी से भी ज़्यादा समय से भारत में सौर अनुसंधान का एक अग्रणी केन्द्र रहा है। भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) द्वारा संचालित, इस वेधशाला को देश की सबसे लंबे समय से चलने वाली खगोलीय वेधशाला होने का गौरव हासिल है और यह सूर्य के बारे में दुनिया के सबसे व्यापक एवं निरंतर दैनिक रिकॉर्ड में से एक को दर्ज करती है।

सौर भौतिकी के क्षेत्र में इस वेधशाला का व्यापक एवं स्थायी योगदान है। अपने 125 वर्षों के संचालन काल में, केएसओ के शोधकर्ताओं ने सनस्पॉट, सौर ज्वालाओं, प्रमुखताओं और सौर प्रभामंडल पर उल्लेखनीय अध्ययन किए हैं, जिससे सौर गतिविधि और पृथ्वी पर इसके प्रभाव के बारे में हमारी समझ में काफी वृद्धि हुई है।

कोडईकनाल सौर वेधशाला (केएसओ) के 125वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में जारी स्मारक डाक टिकट

यह स्मारक डाक टिकट कोडईकनाल सौर वेधशाला को एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में सम्मानित करता है और इसके समृद्ध इतिहास, उल्लेखनीय वैज्ञानिक उपलब्धियों तथा समाज के प्रति इसके अटूट योगदान का उत्सव मनाता है।

यह टिकट अब देशभर में फिलैटेलिक ब्यूरो में उपलब्ध है और इसे www.epostoffice.gov.in  पर ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

डाक विभाग नागरिकों, विज्ञान प्रेमियों और डाक टिकट संग्रहकर्ताओं को सौर उत्कृष्टता के 125 वर्षों को समर्पित इस स्मारक टिकट को प्राप्त करके इस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए आमंत्रित करता है।

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जनपद के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के मध्य कानपुर के समग्र विकास की रणनीति पर चर्चा एवं संवाद

दैनिक भारतीय स्वरूप जिला सूचना कार्यालय कानपुर नगर, सर्किट हाउस में जनपद के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के मध्य शासन की मंशानुसार कानपुर के समग्र विकास की रणनीति पर चर्चा एवं संवाद हुआ। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से संवाद स्थापित करते हुए अपने-अपने स्तर से जनपद के विकास हेतु सुझाव भी दिए तथा इन सुझावों को अमल में लाने के लिए जिलाधिकारी महोदय ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा- निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिए कि वे अपनी परियोजनाओं की विस्तृत सूचना ससमय जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराएं, जिससे शासन की नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने में तेज गति मिल सके। उन्होंने अधिकारियों से मा. जनप्रतिनिधियों के साथ सौहार्दपूर्ण व सामंजस्य स्थापित करते हुए काम करने पर जोर दिया। बैठक के दौरान जनपद के विकास एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा हेतु प्रत्येक माह बैठक आयोजित कराए जाने पर सहमति व्यक्त किया गया। बैठक में सांसद रमेश अवस्थी, माननीय सांसद देवेंद्र सिंह भोले, महापौर प्रमिला पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक राहुल बच्चा सोनकर, राज्यसभा अध्यक्ष प्रतिनिधि, एमएलसी सलिल बिश्नोई के प्रतिनिधि सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के उपरांत जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों द्वारा सर्किट हाउस स्थित नवनिर्मित प्रेसीडेंशियल हाउस का निरीक्षण कर स्थितियों को परखते हुए आवश्यक दिशा -निर्देश दिए गए बैठक में जनप्रतिनिधियों व जिलाधिकारी महोदय के अलावा ज्वाइंट सीपी, एमडी केस्को, नगर आयुक्त, मुख्य विकास अधिकारी, एडीएम नगर एवं वित्त,पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई समेत सभी संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहें ।

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समाधान दिवस, दिव्यांग जानों हेतु आयोजित किया गया विशेष कैम्प*

दैनिक भारतीय स्वरूप जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता मे सम्पूर्ण समाधान दिवस , बिल्हौर का आयोजन बिल्हौर ब्लॉक सभागार मे किया गया, जिसमें जिलाधिकारी के निर्देश पर दिव्यांगजन हेतु विशेष कैम्प का आयोजन भी किया गया जिसमे चिकित्सा विभाग, पूर्ति विभाग, राजस्व विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग , भारतीय डाक विभाग के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहें। कैम्प मे 102 दिव्यांगजनों के ऑनलाइन आवेदन करा कर दिव्यांग बोर्ड के डॉक्टर द्वारा शारीरिक परीक्षण किया गया, जिसमें 75 दिव्यांगजनो के यू०डी०आई०डी० कार्ड/दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत कर जिलाधिकारी द्वारा वितरित किया गया। 5 दिव्यांगजनों के आवेदन रिजेक्ट और 22 रेफर किए गये। कैंप मे 03 दिव्यांगजन के दिव्यांग पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कराया गया। 10 दिव्यांगजन के आय प्रमाण पत्र, 08 दिव्यांगजनों के राशन कार्ड, 10 दिव्यांगजनों के सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत चिन्हांकन किया गया। 10 दिव्यांगजन के एन०पी०सी०आई० मैप इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के नवीन खाते खोले गये।

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी उपजिलाधकारी, बिल्हौर, रश्मि सिंह लाम्बा, जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी व तहसीलदार बिल्हौर मौजूद रहें ।

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जिला भूमि एवं जल संरक्षण समिति, डब्ल्यूसीडीसी मिशन समिति, कृषि विभाग एवं गेहूं क्रय केंद्रों की प्रगति की समीक्षा बैठक संपन्न

भारतीय स्वरूप जिला सूचना कार्यालय जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला भूमि एवं जल संरक्षण समिति, डब्ल्यूसीडीसी मिशन समिति, कृषि विभाग एवं गेहूं क्रय केंद्रों की प्रगति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई।

*लाभार्थी आधारित योजनाओं में बैंकों की भूमिका पर हुई समीक्षा*

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन बैंकों द्वारा योजनाओं के लाभार्थियों को समय पर लाभ नहीं दिया जा रहा है, उनकी सूची बनाकर संबंधित विभाग को के द्वारा उपलब्ध कराई जाए जैसे बैंक जो जो योजना में लापरवाही बरत रहे है उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने निर्देशित करते हुए कहा कि जिन विभागों की लाभार्थी परक योजनाओं से जुड़ी बैंक में जो भी समस्याएं है उनकी सूची बनाते हुए एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने जिला उद्यान अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के प्रत्येक ब्लॉक से 100-100 प्रगतिशील कृषकों की सूची एक सप्ताह में तैयार करना सुनिश्चित करें।।
जिलाधिकारी ने जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए कहा कि जैविक खेती करने वाले किसानों को सहभागिता योजना के अंतर्गत एक सप्ताह के अंदर समस्त कार्रवाई करते हुए उन्हें उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें ।
जिलाधिकारी ने जिला उद्यान अधिकारी को किसानों के लिए अस्थायी आउटलेट हेतु भूमि चिन्हित कर विपणन सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

*गेहूं क्रय केंद्रों की समीक्षा*

जिलाधिकारी ने गेहूं क्रय की समीक्षा करते हुए यह पाया कि जनपद में कुल 70 गेहूं क्रय केंद्रो का लक्ष्य 28500 मी0टन के सापेक्ष मात्र 8841.30 मी0टन 31.02 प्रतिशत की खरीद हुई है, जिसमें जनपद कानपुर नगर प्रदेश में गेहूं खरीद में 29 में स्थान पर है,
खाद्य विभाग के क्रय केंद्रों द्वारा लक्ष्य का 65.45 प्रतिशत खरीद की गई है, किंतु सहकारिता द्वारा संचालित क्रय केंद्रों के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 13.27 प्रतिशत की खरीद की गई है।
जनपद में सबसे खराब खरीद करने वाले upss संस्था द्वारा मात्र 8 प्रतिशत ही किए जाने पर जिलाधिकारी ने जिला प्रबंधक upss श्री भानु प्रताप के विरुद्ध करवाई हेतु उनके प्रबंध निदेशक upss को पत्र भेजने के निर्देश दिए।
जिलधिकारी ने सहकारिता विभाग के ए0आर0 कोऑपरेटिव कानपुर नगर को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि 01 सप्ताह के भीतर गेहूं खरीद में वृद्धि लाने हेतु गांव में जाकर किसानों से संपर्क कर लक्ष्य के अनुसार खरीद करें अन्यथा की दशा में उनके खिलाफ भी कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, अपर जिलाधिकारी आपूर्ति, कृषि अधिकारी, पंचायत राज अधिकारी, उद्यान अधिकारी, डिप्टी आरएमओ आदि उपस्थित थे।

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लेबर कॉलोनी का मालिकाना हक- जो जहां है, उसी को उसका मालिक बना दिया जाए-मैथानी*

भारतीय स्वरूप संवाददाता आज लखनऊ बापू भवन में उत्तर प्रदेश परामर्श दात्री समिति श्रम मंत्रालय की बैठक प्रमुख सचिव श्रम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। जिसमें विधायक सुरेंद्र मैथानी द्वारा,पूर्व में उत्तर प्रदेश सदन में लगाई गई याचिका एवं लंबे समय से किये जा रहे संघर्ष के, उन सारे बिंदुओं को शामिल किया गया, जिन पर लेबर कॉलोनी के निवासियों के मालिकाना पर फैसला काफी कुछ उनके पक्ष में आए।

विधायक ने बैठक मे कहा कि मैं जीवन के 42 वर्ष लेबर कॉलोनी में रहा हूं मुझसे बेहतर पूरे उत्तर प्रदेश में वहां का दर्द और वहां का निवारण दूसरा कोई नहीं बता सकता। उन्होंने उक्त बैठक में कहा की कॉलोनीयों के स्वामित्व के मामले में, जो जहां है,जितना है, जिसके पास है और जैसा है,उसी हालत में, उसी को उसका मालिकाना हक, मात्र टोकन मनी ले करके, दे दिया जाए।यह इसका व्यावहारिक पक्ष है। यदि हम कानूनी दांव पेज और दशकों पुराने, अव्यावहारिक नियमों के हिसाब से, कोई नियमावली बनाएंगे, तो वह सफल नहीं होगी। इसलिए हमें व्यावहारिक पक्ष के आधार पर ही, जनहित में अपनी संस्तुति करके, कैबिनेट को प्रस्ताव भेजना चाहिए।

*विशेष सचिव द्वारा कहा गया कि पहले खाली पड़ी हुई जगह पर कमर्शियल स्पेस बना लिया जाए और फिर मूल आवंटी और उसके बाद सिग्मी लोगों और उसके बाद बड़े लोगों के काबिज मकान को,अलग-अलग दर पर,उन्हें आवंटन करने की पॉलिसी बनाई जाए।या पहले खाली पड़े हुए पार्क में, स्थलों पर, अपार्टमेंट की तर्ज पर फ्लैट बनाया जाए और उनका आवंटन करके, तब इस कॉलोनी को डिमोलिश करके, दोबारा इसका निर्माण कर,जो जिस श्रेणी में आता हो,उनको उनकी पात्रता के आधार पर,निर्माण कंप्लीट उपरांत आवंटन किया जाए। जिस पर क्रोधित होकर, विधायक सुरेंद्र मैथानी जी ने उक्त प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह मैं किसी कीमत पर नहीं होने दूंगा।आपने पिछले 60 साल में ₹ 1 का भी मेंटेनेंस नहीं कराया, आप किस आधार पर उसको अपनी संपत्ति मान रहे हो।और हम लोगों ने, हमारी सरकार ने और हमने अपने मुख्यमंत्री जी ने वहाँ की सड़क,नाली,सीवर, बिजली, विकास कार्यों और पार्कों का विकास कराकर, उसे रहने योग्य बनाया है।और अब आप,अपना मालिकाना हक समझकर,आधार हीन,कोई भी ऐसा निर्णय नहीं कर सकते, जो वहां की जनता की मूल भावनाओं के खिलाफ हो। मैं इसका विरोध करता हूं और उसको सड़कों पर उत्तर के भी,किसी भी कीमत पर नहीं होने दूंगा। यह पूरी तरह जन विरोधी है।मुझे समझाने का प्रयास न करें।क्योंकि मैं वहां के कष्ट को जानता हूं और मैं वहां का 42 साल निवासी रहा हूं। पहले मुझसे बात करो,तब कोई कदम,आप आगे बड़ा पाओगे। बैठक के अंत में प्रमुख सचिव सभापति ने कहा की विधायक जी का पक्ष व्यावहारिक है इस पर शास्त्री नगर कॉलोनी और कानपुर की श्रम कॉलोनी से ही इसका सर्वे अध्ययन प्रारंभ करें जिसको 6 महीने के अंदर पूर्ण कर लिया जाए।जिसमें लोकल अथार्टी, नगर निगम अथवा के डी ए अथवा आवास विकास को सम्मिलित करके, उसमें टेक्निकल दृष्टि से जे ई तथा पीडब्ल्यूडी के लोगों को भी शामिल करके और परामर्शदात्री के सदस्य के नाते विधायक जी को भी शामिल करके, इसकी एक अध्ययन रिपोर्ट अभिलंब तैयार की जाए। जिस पर कोई सकारात्मक रिपोर्ट तैयार करके शासन ,कैबिनेट को प्रेषित की जाए। जिससे जल्द से जल्द इस पर सकारात्मक निर्णय आ सके।

 इस पर विधायक जी ने प्रमुख सचिव को इस सकारात्मक दृष्टि में आगे कार्यवाही हेतु बड़ी, बैठक के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

उक्त बैठक में प्रमुख रूप से प्रमुख सचिव श्रम एम के शानमुगा सुंदरम जी, विधायक सुरेंद्र मैथानी जी एवं विधायक मंजू शिवाज जी एवं श्रम आयुक्त मारकंडे शाही जी तथा विशेष सचिव कुणाल सिल्कू, विशेष सचिव निलेश कुमार सिंह,उपश्रमायुक्त पंकज सिंह राणा, उपश्रमायुक्त श्रीमती रचना केसरवानी,उप श्रमायुक्त जय प्रताप जी, उपश्रमायुक्त अनुराग मिश्रा गाजियाबाद एवं विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक मंजू सिवाच एवं अनिल उपाध्याय आदि लोग प्रमुख रूप से थे।

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गाजियाबाद नगर निगम ने देश के पहले प्रमाणित ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए स्थायी जल प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभाई

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत गाजियाबाद ने देश के पहले प्रमाणित ‘ग्रीन म्युनिसिपल बांड’ को सफलतापूर्वक जारी कर स्थायी अवसंरचना और शहरी रेज़िलियंस को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस बांड के माध्यम से 150 करोड़ रुपये की राशि एकत्रित की गई है, जो एक अत्याधुनिक तृतीयक मल-जल शोधन संयंत्र (टीएसटीपी) के विकास में निवेश की जा रही है।

यह सिर्फ़ एक और बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि एक परिवर्तनकारी पहल है, जो गाजियाबाद की अपने नागरिकों के लिए स्थायी भविष्य के निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। एकत्र की गई निधियों को एक उन्नत टीएसटीपी के विकास के लिए निर्देशित किया जा रहा है, जो अभूतपूर्व पैमाने पर अपशिष्ट जल के उपचार और पुनः उपयोग करने के लिए डिज़ाइन की गयी एक अत्याधुनिक सुविधा है।

ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड ने भारत के वित्तीय परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ा है, जो शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के लिए एक स्थायी मॉडल प्रदान करता है। भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से यह परियोजना केवल जल उपचार सुविधा ही नहीं है, बल्कि इससे कहीं अधिक है; यह पूरे देश के भविष्य के शहरों के लिए वित्तीय अनुशासन को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का एक खाका है।

इस पहल के केंद्र में तृतीयक मल-जल शोधन संयंत्र (टीएसटीपी) है, जो एक तकनीकी चमत्कार है जो माइक्रोफिल्ट्रेशन, अल्ट्राफिल्ट्रेशन, नैनोफिल्ट्रेशन और रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) सहित उन्नत मेम्ब्रेन फिल्ट्रेशन प्रौद्योगिकियों का उपयोग करता है। ये अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां यह सुनिश्चित करने के लिए एक साथ काम करती हैं कि उपचारित पानी उच्चतम मानकों को पूरा करे, जिससे यह औद्योगिक प्रक्रियाओं में पुन: उपयोग के लिए उपयुक्त हो जाए।

40 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की उपचार क्षमता के साथ टीएसटीपी एक विशाल 95 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़ा है, जो गाजियाबाद की 1,400 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को उपचारित पानी पहुंचाता है। यह संयंत्र सुनिश्चित करता है कि अपशिष्ट जल अब बर्बाद न हो, बल्कि इसे एक मूल्यवान संसाधन में बदल दिया जाए जो शहर के औद्योगिक क्षेत्र का समर्थन करता है, जिससे ताजे पानी के स्रोतों पर निर्भरता कम हो जाती है।

इस परियोजना की सफलता न केवल इसकी तकनीकी और पर्यावरणीय उपलब्धियों में निहित है, बल्कि इसके नवाचारी वित्तीय ढांचे में भी निहित है। टीएसटीपी  को सार्वजनिक-निजी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (पीपीपी-एचएएम) के तहत विकसित किया गया था, जिसमें 40 प्रतिशत निवेश नगर निगम द्वारा किया गया। इस सार्वजनिक-निजी भागीदारी दृष्टिकोण ने इस परियोजना को वित्तीय अनुशासन के साथ समयबद्ध रूप से लागू करने में सहायता की। ग्रीन बॉन्ड जारी करके जीएनएन की 150 करोड़ रुपये जुटाने की सफलता ने शहर के सतत दृष्टिकोण में निवेशकों के विश्वास को प्रदर्शित किया और शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) में वित्तीय पारदर्शिता और अनुशासन का एक नया स्तर लाया है।

जीएनएन ने 9.5 एमएलडी तृतीयक उपचारित जल की आपूर्ति के लिए 800 से अधिक फर्मों के साथ अनुबंध किया, जिससे शहरी जल प्रबंधन में शहर की अग्रणी स्थिति स्थापित हुई। गाजियाबाद के इस अभिनव दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर भी सराहा गया। शहर को वाटर डाइजेस्ट वर्ल्ड वाटर अवार्ड्स 2024-25 में सर्वश्रेष्ठ म्यूनिसपल ट्रीटेड वाटर अवार्ड से सम्मानित किया गया, जो जल संरक्षण, पुनर्चक्रण और स्थायी जल प्रबंधन में शहर की उत्कृष्टता को मान्यता देता है।

वेस्ट सफ़ोक कॉलेज, इंग्लैंड के 22 छात्रों और 4 संकाय सदस्यों की एक टीम ने एक एक्सपोज़र विजिट के तहत गाजियाबाद नगर निगम का दौरा किया। इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान इस टीम ने टीएसटीपी संयंत्र और अन्य परियोजनाओं का निरीक्षण किया तथा स्मार्ट शहरों और सतत विकास के प्रति गाजियाबाद की प्रतिबद्धता को निकट से देखा।

उन्नत जल उपचार प्रौद्योगिकियों, नवाचारी वित्तीय मॉडलों और पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ गाजियाबाद स्वच्छ, स्मार्ट और अधिक रेज़िलियंट शहरों के लिए भारत की खोज में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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