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प्रधानमंत्री ने तुमकुरु में एचएएल हेलीकाप्टर संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किया

प्रधानमंत्री मोदी ने आज तुमकुरु में एचएएल हेलीकॉप्‍टर संयंत्र को राष्‍ट्र को समर्पित किया। उन्होंने तुमकुरु औद्योगिक टाउनशिप और तुमकुरु में तिप्टूर और चिक्कानायकनहल्ली में दो जल जीवन मिशन परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। प्रधानमंत्री ने हेलीकॉप्टर संयंत्र और संरचना हैंगर का दौरा किया और लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर का अनावरण किया।

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्नाटका संतों, ऋषियों-मनीषियों की भूमि है, जिसने अध्यात्म, ज्ञान विज्ञान की महान भारतीय परंपरा को सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि इसमें भी तुमकुरु का विशेष स्थान है और सिद्धगंगा मठ की इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने बताया कि पूज्य शिवकुमार स्वामी द्वारा छोड़ी गई अन्ना, अक्षरा और आश्रय की विरासत को श्री सिद्धलिंग स्वामी आज आगे बढ़ा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संतों के आशीर्वाद से आज कर्नाटका के युवाओं को रोजगार देने वाले, ग्रामीणों और महिलाओं को सुविधा देने वाले, देश की सेना और मेड इन इंडिया को ताकत देने वाले, सैकड़ों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के युवाओं की प्रतिभा और नवाचार की सराहना की और कहा कि कर्नाटका युवा टैलेंट, युवा इनोवेशन की धरती है और ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग से लेकर तेजस फाइटर प्लेन बनाने तक, कर्नाटक की मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ताकत को दुनिया देख रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “डबल-इंजन सरकार ने कर्नाटक को निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है।” प्रधानमंत्री ने आज समर्पित एचएएल परियोजना के माध्यम से उस बिंदु पर जोर देते हुए इसका उदाहरण दिया, जिसके लिए प्रधानमंत्री ने रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी निर्भरता को कम करने के संकल्प के साथ 2016 में आधारशिला रखी थी।

प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज सैकड़ों ऐसे हथियार और रक्षा उपकरण हैं, जो भारत में ही बन रहे हैं, जो हमारी सेनाएं उपयोग कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “उन्नत असॉल्ट राइफल से लेकर टैंक, विमान वाहक, हेलीकॉप्टर, लड़ाकू जेट, परिवहन विमान तक, भारत इन सभी का निर्माण कर रहा है।” एयरोस्पेस क्षेत्र पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 8-9 वर्षों में इस क्षेत्र में किया गया निवेश 2014 से 15 साल पहले किए गए निवेश की तुलना में पांच गुना अधिक है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि मेड इन इंडिया हथियारों की न केवल हमारे सशस्त्र बलों को आपूर्ति की जाती है, बल्कि 2014 से पहले के वर्षों की तुलना में रक्षा निर्यात भी कई गुना बढ़ गया है। निकट भविष्य में जो 4 लाख करोड़ के व्यवसायों को जन्म देगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “जब ऐसी निर्माण इकाइयां स्थापित की जाती हैं, तो यह न केवल सशस्त्र बलों को मजबूत करती है, बल्कि रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर भी पैदा करती है।” श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने तुमकुरु में हेलीकॉप्टर निर्माण संयंत्र के पास छोटे व्यवसायों को सशक्त बनाया है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब नेशन फर्स्ट, राष्ट्र प्रथम की भावना से काम होता है, तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के कामकाज में प्रगति और सुधार के साथ-साथ निजी क्षेत्र के लिए अवसर खोलने की बात की।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में एचएएल के नाम पर सरकार को निशाना बनाने के प्रचार का जिक्र किया और कहा कि हमारी सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा, “यही एचएएल है जिसका नाम लेकर लोगों को भड़काने की साजिश रची गई लोगों को उकसाया गया। लेकिन झूठ कितना ही बड़ा क्यों ना हो, सच के आगे हारता है और एक दिन जरूर हारता है। आज एचएएल कि यह हेलीकॉप्टर फैक्ट्री, एचएएल की बढ़ती ताकत, बहुत से पुराने झूठे और झूठे आरोप लगाने वालों का पर्दाफाश कर रही है।” उन्होंने कहा कि आज वही एचएएल भारत की सेना के लिए आधुनिक तेजस बना रहा है, विश्व के आकर्षण का केंद्र है और रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि फूड पार्क और एचएएल के बाद औद्योगिक टाउनशिप तुमकुरु के लिए एक बड़ा उपहार है जो तुमकुरु को देश के एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पीएम गतिशक्ति मास्टरप्लान के तहत टाउनशिप का विकास किया जा रहा है, जो मुंबई-चेन्नई राजमार्ग, बेंगलुरु हवाई अड्डे, तुमकुरु रेलवे स्टेशन, मंगलुरु बंदरगाह के माध्यम से मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी से जुड़ा होगा।

श्री मोदी ने कहा, “डबल इंजन सरकार सामाजिक बुनियादी ढांचे पर उतना ही ध्यान दे रही है जितना भौतिक बुनियादी ढांचे पर दे रही है।” इस वर्ष के बजट पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जल जीवन मिशन के लिए बजट आवंटन में पिछले वर्ष की तुलना में 20,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है और कहा कि इस योजना के सबसे बड़े लाभार्थी माताएं और बहनें हैं, जिन्हें अपने घरों के लिए पानी लाने के लिए दूर तक नहीं जाना पड़ता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले तीन वर्षों में परियोजना का दायरा 3 करोड़ ग्रामीण परिवारों से बढ़कर 11 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक पहुंच गया है। डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊपरी भद्रा परियोजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे तुमकुरु, चिकमंगलुरु, चित्रदुर्ग, दावणगेरे और मध्य कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने उन किसानों को होने वाले लाभों पर भी प्रकाश डाला जो वर्षा जल पर निर्भर हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का मध्यवर्ग हितैषी बजट ‘विकसित भारत’ के लिए सभी के प्रयासों को बल देगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह बजट समर्थ भारत, संपन्न भारत, स्वयंपूर्ण भारत, शक्तिमान भारत, गतिवान भारत की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। आजादी के इस अमृतकाल में, कर्तव्यों पर चलते हुए विकसित भारत के संकल्पों को सिद्ध करने में इस बजट का बड़ा योगदान है। यह सर्वप्रिय बजट है। सर्वहितकारी बजट है। सर्वसमावेशी बजट है। सर्व-स्पर्शी बजट है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष मनाएगा, उस सशक्त भारत की नींव, इस बार के बजट में और मजबूत की है। इस साल के गरीब हितैषी मध्यम वर्ग हितैषी बजट की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए सब जुड़ें, सब जुटें, सब का प्रयास कैसे हो, इसके लिए यह बजट बहुत ताकत देने वाला है।” उन्होंने कृषि में वंचितों, युवाओं और महिलाओं के लिए बजट के लाभों के बारे में विस्तार से बताया, “यह भारत के युवा को रोजगार के नए अवसर देने वाला बजट है। यह भारत की नारी शक्ति की भागीदारी बढ़ाने वाला बजट है। यह भारत की कृषि को गांव को आधुनिक बनाने वाला बजट है। यह श्रीअन्न से छोटे किसानों को वैश्विक ताकत देने वाला बजट है। यह भारत में रोजगार बढ़ाने वाला और स्वरोजगार को बल देने वाला बजट है।” उन्होंने कहा, “हमने तीनों पहलुओं – आपकी जरूरतें, आपको दी जाने वाली सहायता और आपकी आय को ध्यान में रखा।”

प्रधानमंत्री ने समाज के उस वर्ग को सशक्त बनाने के लिए 2014 से सरकार के प्रयासों पर जोर दिया, जिनके लिए सरकारी सहायता प्राप्त करना एक कठिन कार्य था। प्रधानमंत्री ने कहा, “या तो सरकारी योजनाएं उन तक नहीं पहुंचीं, या इसे बिचौलियों द्वारा लूटा गया।” प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ग को दी गई सहायता पर प्रकाश डाला, जो पहले इससे वंचित था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहली बार ‘कर्मचारी-मजदूर’ वर्ग को पेंशन और बीमा की सुविधा मिली है। उन्होंने छोटे किसानों की मदद के लिए पीएम-किसान सम्मान निधि का जिक्र किया और स्ट्रीट वेंडर्स द्वारा लिए गए कर्ज का जिक्र किया। यह बताते हुए कि इस वर्ष का बजट उसी भावना को आगे ले जाता है, प्रधानमंत्री ने पीएम विकास योजना पर प्रकाश डाला, जो कुम्बरा, काम्मारा, अक्कासलिगा, शिल्पी, गारेकेलासदावा, बग्गी और अन्य जैसे शिल्पकारों या विश्वकर्माओं को बढ़ावा देगा, जो अपनी हस्तकला और हाथ के औजारों के बल पर कुछ बनाते हैं और अपनी कला और कौशल को और समृद्ध करते हैं।

प्रधानमंत्री ने वंचितों और गरीबों की मदद के लिए किए गए कई उपाय गिनाए। सरकार ने महामारी के दौरान गरीबों के लिए मुफ्त राशन पर 4 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। गरीबों के आवास के लिए अभूतपूर्व 70 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मध्यम वर्ग को लाभ पहुंचाने वाले बजट के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने आयकर में कर लाभों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “7 लाख रुपये तक की आय पर आयकर शून्य होने से मध्यम वर्ग में बहुत उत्साह है। खासकर 30 साल से कम उम्र के युवा, जिनके पास नई नौकरी है, नया कारोबार है, उनके खाते में हर महीने ज्यादा पैसा आएगा।” इसी तरह, जमा सीमा को 15 लाख से बढ़ाकर 30 लाख करने से सेवानिवृत्त कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों को मदद मिलेगी। लीव इनकैशमेंट पर टैक्स छूट अब 25 लाख तक है जो पहले 3 लाख थी।

महिलाओं के वित्तीय समावेशन की केंद्रीयता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “महिलाओं का वित्तीय समावेशन घरों में उनकी आवाज को मजबूत करता है और घरेलू फैसलों में उनकी भागीदारी को बढ़ाता है। इस बजट में हमने अपनी माताओं, बहनों और बेटियों को अधिक से अधिक बैंकों से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। हम महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र लेकर आए हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा, सुकन्या समृद्धि, मुद्रा, जन-धन योजना और पीएम आवास के बाद महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए यह एक बड़ी पहल है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल तकनीक या सहकारी समितियों के विस्तार के माध्यम से हर कदम पर किसानों की सहायता करते हुए इस बजट का अधिकतम फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को लाभ होगा, जबकि कर्नाटक के गन्ना किसानों को गन्ना सहकारी समितियों की स्थापना से मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में खाद्यान्न भंडारण के लिए देश भर में कई नई सहकारी समितियां भी बनेंगी और बड़ी संख्या में स्टोर बनाए जाएंगे। इससे छोटे किसान भी अपना अनाज स्टोर कर सकेंगे और बेहतर कीमत पर बेच सकेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती के जरिए छोटे किसानों की लागत कम करने के लिए हजारों सहायता केंद्र भी बनाए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में मोटे अनाज के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि देश उसी विश्वास को आगे बढ़ा रहा है जहां मोटे अनाज को ‘श्री अन्न’ के रूप में पहचान दी गई है। उन्होंने इस साल के बजट में मोटे अनाज के उत्पादन पर दिए गए जोर पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इससे कर्नाटक के छोटे किसानों को बहुत फायदा होगा।

इस अवसर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री बसवराज बोम्मई, केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री ए. नारायणस्वामी और कर्नाटक सरकार के मंत्री और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री ने तुमकुरु में एचएएल हेलीकॉप्टर फैक्ट्री राष्ट्र को समर्पित की। इसकी आधारशिला भी 2016 में प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी। यह एक समर्पित नई ग्रीनफील्ड हेलीकॉप्टर फैक्ट्री है, जो हेलीकॉप्टर बनाने की क्षमता और इकोसिस्टम को आगे बढ़ाएगी। यह एशिया की सबसे बड़ी हेलीकॉप्टर निर्माण सुविधा है और शुरुआत में लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) का उत्पादन करेगी। एलयूएच एक स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित 3-टन वर्ग, एकल इंजन बहुउद्देश्यीय उपयोगिता हेलीकाप्टर है, जिसमें उच्च गतिशीलता की अनूठी विशेषता है। कारखाने का विस्तार अन्य हेलीकॉप्टरों जैसे लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) और इंडियन मल्टीरोल हेलीकॉप्टर (आईएमआरएच) के निर्माण के साथ-साथ भविष्य में एलसीएच, एलयूएच, सिविल एएलएच और आईएमआरएच की मरम्मत और ओवरहाल के लिए किया जाएगा। कारखाने में भविष्य में सिविल एलयूएच के निर्यात की भी संभावना है। यह सुविधा भारत को हेलीकॉप्टरों की अपनी संपूर्ण आवश्यकता को स्वदेशी रूप से पूरा करने में सक्षम बनाएगी और भारत में हेलीकॉप्टर डिजाइन, विकास और निर्माण में आत्मनिर्भरता का गौरव प्राप्त करेगी। कारखाने में उद्योग 4.0 मानकों का विनिर्माण सेट-अप होगा। अगले 20 वर्षों में, एचएएल तुमकुरु से 3-15 टन के वर्ग में 1000 से अधिक हेलीकाप्टरों का उत्पादन करने की योजना बना रहा है। इससे प्रदेश में करीब छह हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने तुमकुरु औद्योगिक टाउनशिप की आधारशिला भी रखी। राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम के तहत, तुमकुरु में तीन चरणों में 8484 एकड़ में फैले औद्योगिक टाउनशिप का विकास चेन्नई बेंगलुरु औद्योगिक कॉरिडोर के हिस्से के रूप में किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने तुमकुरु में तिपतुर और चिक्कनायकनहल्ली में दो जल जीवन मिशन परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। तिप्तूर बहु-ग्राम पेयजल आपूर्ति परियोजना 430 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई जाएगी। लगभग 115 करोड़ रुपये की लागत से चिक्कानायकनहल्ली तालुक की 147 बस्तियों के लिए बहु-ग्राम जलापूर्ति योजना का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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प्रधानमंत्री ने आज बेंगलुरू में ई20 ईंधन की शुरुआत की और हरित गतिशीलता रैली को हरी झंडी दिखाई

प्रधानमंत्री ने 6 फरवरी 2023 को कर्नाटक के बेंगलुरु में भारत ऊर्जा सप्ताह (आईईडब्ल्यू)- 2023 का उद्घाटन किया। 6 से 8 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस आईईडब्ल्यू का उद्देश्य एक ऊर्जा रूपांतरण पावरहाउस के रूप में भारत की बढ़ती शक्ति को प्रदर्शित करना है। इस समारोह के एक हिस्से के तहत प्रधानमंत्री ने ई20 ईंधन को शुरू किया और तेल व गैस पीएसयू और पीएलएल की ओर से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा आयोजित हरित गतिशीलता (मोबिलिटी) रैली को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस व आवास और शहरी कार्य मंत्री, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस व श्रम और रोजगार राज्य मंत्री ने समारोह की गरिमा बढ़ाई।

ई20 ईंधन:

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बेंगलुरू में भारत ऊर्जा सप्ताह के दौरान ई20 ईंधन की शुरुआत की

इथेनॉल ब्लेंडिंग (सम्मिश्रण) रोडमैप के अनुरूप प्रधानमंत्री ने 11 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में तेल विपणन कंपनियों के 84 रिटेल आउटलेट्स पर ई20 ईंधन को शुरू किया। ई20 पेट्रोल के साथ 20 फीसदी इथेनॉल का एक मिश्रण है। सरकार का लक्ष्य 2025 तक इथेनॉल के पूर्ण 20 फीसदी सम्मिश्रण को प्राप्त करना है। एचपीसीएल और अन्य तेल विपणन कंपनियां 2जी-3जी इथेनॉल संयंत्र स्थापित कर रही हैं, जो इसकी प्रगति को सुगम बनाएगी।

ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम सरकार का एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र रहा है। इस संबंध में सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2013-14 से अब तक इथेनॉल उत्पादन क्षमता में छह गुना की बढ़ोतरी देखी गई है। इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम और जैव ईंधन कार्यक्रम के तहत पिछले आठ वर्षों की उपलब्धियों ने न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को संवर्द्धित किया है, बल्कि इसके परिणामस्वरूप कई अन्य लाभ भी हुए हैं। इनमें कार्बनडायऑक्साइड उत्सर्जन में 318 लाख मीट्रिक टन की कमी और लगभग 54,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत शामिल है। इसके परिणामस्वरूप 2014 से 2022 के दौरान इथेनॉल आपूर्ति के लिए लगभग 81,800 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और किसानों को 49,000 करोड़ रुपये से अधिक का हस्तांतरण किया गया है।

हरित गतिशीलता रैली:

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बेंगलुरु में हरित गतिशीलता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने एचपीसीएल द्वारा आयोजित हरित गतिशीलता रैली को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रैली में स्थायी हरित ऊर्जा स्रोतों जैसे कि ई20, ई85, फ्लेक्स फ्यूल, हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक आदि पर चलने वाली 57 गाड़ियों की भागीदारी देखी गई। इस रैली ने हरित ईंधन के लिए लोगों के बीच जागरूकता उत्पन्न करने में सहायता की। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस व श्रम और रोजगार राज्य मंत्री श्री रामेश्वर तेली ने इस रैली के समापन कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह हरित गतिशीलता रैली राष्ट्र में हरित और टिकाऊ ईंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाने में सहायता करेगी। उन्होंने आगे कहा कि इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम व राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी भारत सरकार की नीति भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के अपने लक्ष्य की ओर ले जाएगी और 2070 तक नेट जीरो को साकार करेगी।

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रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष में जनवरी, 2023 तक माल ढुलाई से 1,35,387 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की

मिशन मोड के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 के पहले दस महीनों में भारतीय रेलवे की माल ढुलाई पिछले साल की समान अवधि की लोडिंग और आय के आंकड़े को पार कर गई है।

संचयी आधार पर अप्रैल, 2020 से जनवरी, 2023 तक पिछले वर्ष की 1159.08 मिलियन टन की लोडिंग की तुलना में 7 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 1243.46 मिलियन टन की माल ढुलाई हुई। वहीं, रेलवे ने पिछले साल के 1,17,212 करोड़ रुपये की तुलना में 1,35,387 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की है। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 16 फीसदी अधिक है।

जनवरी, 2023 के दौरान 134.07 मिलियन टन की प्रारंभिक माल ढुलाई की गई है। यह जनवरी, 2022 के 129.12 मिलियन टन की ढुलाई से 4 फीसदी अधिक है। वहीं, रेलवे ने जनवरी, 2022 में 13,172 करोड़ रुपये की माल ढुलाई आय की तुलना में 13 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 14,907 करोड़ रुपये का माल ढुलाई राजस्व प्राप्त किया है।

भारतीय रेलवे ने “हंग्री फॉर कार्गो” के मंत्र का अनुपालन करते हुए व्यवसाय करने में सुगमता के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सेवा वितरण में सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। इसके परिणामस्वरूप रेलवे में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक कमोडिटी में ढुलाई के लिए अधिक माल आ रहा है। त्वरित नीति निर्माण द्वारा समर्थित ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण और व्यवसाय विकास इकाइयों के कार्य ने रेलवे की इस उपलब्धि को प्राप्त करने में सहायता की।

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प्रधानमंत्री ने तुर्की में भूकंप से हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया

प्रधानमंत्री  मोदी ने तुर्की में भूकंप के कारण हुई जनहानि और सम्पत्ति को होने वाले नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

तुर्की के राष्ट्रपति के ट्वीट के प्रत्युत्तर में प्रधनमंत्री ने कहा हैः

“तुर्की में भूकंप के कारण हुई जनहानि और सम्पत्ति को होने वाले नुकसान से व्यथित हूं। शोक-संतप्त परिवारों के साथ संवेदनायें। घायलों के जल्द स्वास्थ्य-लाभ की कामना करता हूं। तुर्की के लोगों के साथ भारत एकजुटता से खड़ा है और इस त्रासदी का सामना करने के लिये हर संभव सहायता पहुंचाने के लिये तत्पर है।”

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जिलाधिकारी द्वारा नगर निगम के डी0पी0एस0 ग्राउण्ड में प्रस्तावित फूटसल कोर्ट के विकास के संबंध में स्थलीय निरीक्षण

जिलाधिकारी विशाख जी द्वारा आज दिनांक 6 फरवरी 2023 को नवाबंगज क्षेत्र स्थित नगर निगम के डी0पी0एस0 ग्राउण्ड में प्रस्तावित फूटसल कोर्ट के विकास के संबंध में स्थलीय निरीक्षण किया गया। फुटसल खेल फीफा द्वारा मान्यता प्राप्त इनडोर फुटबॉल का रूप है (यह शब्द स्पेनिश फुटबॉल सालाश् का संकुचन है)। यह दो टीमों के बीच खेला जाता है, जिनमें से प्रत्येक टीम के पास किसी भी समय पिच पर पांच खिलाड़ी होते हैं, जिसमें रोलिंग विकल्प और सॉकर की तुलना में एक छोटी गेंद होती है, जो कठिन और कम उछाल वाली होती है। जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नगर निगम मैदान का निरीक्षण कर निम्न निर्देश दिए गए:-

फुटसल कोर्ट के विकास हेतु मानचित्र को देखा गया तथा फुटसल कोर्ट को आधुनिक बनाये जाने के उद्देश्य से कोर्ट की लंबाई/चैड़ाई एवं अन्य व्यवस्थाओं के प्रतिस्थापन के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।
ऽ फुटसल कोर्ट हेतु लाइट व उसकी ऊॅचाई तथा ओरिएटेशन का विशेष ध्यान दिए जाने तथा कोर्ट के दोनो तरफ सिंगल हाई मास्ट लाइट लगाये जाने के निर्देश दिए गए ताकि प्रकाश में किसी प्रकार बाधा उत्पन्न न हो।
ऽ प्रस्तावित कोर्ट में दर्शकों हेतु एलीवेटेड स्थल को भी चयनित किया जाये।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जी0एन0, मयंक यादव जोनल अधिकारी, दिवाकर भास्कर जोनल अभियन्ता, डा0 वी0के0 सिंह उद्यान अधिकारी, जोनल स्वच्छता अधिकारी व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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जिले में हो रहे इन्वेस्टर समिट और कानपुर देहात महोत्सव में देश के पीएम और यूपी के सीएम की नही है जरूरत*

 

*जिले में हो रहे इन्वेस्टर समिट और कानपुर देहात महोत्सव में देश के पीएम और यूपी के सीएम की नही है जरूरत*

*इन्वेस्टर समिट कार्यक्रम और कानपुर देहात महोत्सव के सैकड़ो पोस्टरों से पीएम और सीएम की फोटो नदारद,*

*पीएम और सीएम की फोटो न होने से यूपी की राज्यमंत्री दिखी नाराज,*

*राज्यमंत्री ने डीएम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मामले की घोर निंदा की है,*

*डीएम पर लगाया पीएम और सीएम की छवि धूमिल करने का आरोप – राज्यमंत्री*

*पीएम की महत्वकांक्षी योजना और सीएम के मंसूबों पर पानी फेरने का आरोप – राज्यमंत्री*

*जिले में करोड़ो के चंदा से शुरू इन्वेस्टर्स समिट और कानपुर देहात महोत्सव,*

*डीएम की तानाशाही और मनमानी की तस्वीर आई सामने,*

*डीएम ने देश के पीएम और यूपी के सीएम की फोटो को पोस्टरों पर लगाना नही समझा आवश्यक,*

*मामले पर डीएम ने कुछ भी बोलने से किया इनकार,*

*देश के पीएम और यूपी के सीएम की फोटो के बिना इन्वेस्टर समिट एव कानपुर देहात महोत्सव का कार्यक्रम हुआ शुरू,*

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जनवरी, 2023 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा कुल 1,25,992 शिकायतों का निपटारा किया गया, शिकायतों का निपटारा करने का औसत समय 19 दिन/शिकायत, केंद्रीय सचिवालय में लंबित मामलों की संख्या 67,283, जो अब तक लंबित मामलों की सबसे कम संख्या है

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने जनवरी, 2023 के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) की मासिक रिपोर्ट जारी की है, जो सार्वजनिक शिकायतों के प्रकार, श्रेणियों और निपटारे की प्रकृति का विस्तृत विश्लेषण करती है। रिपोर्ट में शिकायत निवारण तंत्र को और ज्यादा मजबूती प्रदान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सक्षम लोक शिकायत विश्लेषण और प्रबंधन पर आईआईटी कानपुर के सहयोग से डीएआरपीजी द्वारा किए गए तकनीकी अपडेट को भी शामिल किया गया है। जनवरी, 2023 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा कुल 1,25,992 शिकायतों का निपटारा किया गया, शिकायतों के निपटारे का औसत समय 19 दिन/शिकायत रहा जबकि केंद्रीय सचिवालय में लंबित मामलों की संख्या 67,283 रही, जो अब तक का सबसे कम लंबित मामला है। वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग और यूआईडीएआई शिकायतों का समय पर निपटारा और निपटारे की गुणवत्ता मामले में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के शिकायत निवारण सूचकांक में शीर्ष पर रहे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में प्राप्त शिकायतों में से 66 प्रतिशत शिकायतें सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से प्राप्त हुई।

जनवरी 2023 में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए डीएआरपीजी की मासिक सीपीजीआरएएमएस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

पीजी मामले

जनवरी, 2023 में, सीपीजीआरएएमएस पोर्टल पर 1,23,968 पीजी मामलों प्राप्त हुए, जिनमें से 1,25,922 पीजी मामलों का निपटारा किया गया और 31 जनवरी, 2023 तक 67,283 पीजी मामले लंबित हैं। केंद्रीय सचिवालय में लंबित पीजी मामलों मामलों की संख्या दिसंबर, 2022 के अंत में 69,204 थी, जो जनवरी, 2023 के अंत में घटकर 67,283 रह गई है।

जनवरी, 2023 में, वित्तीय सेवा विभाग (बैंकिंग प्रभाग) [17,026 शिकायतें], श्रम और रोजगार मंत्रालय [11,139 शिकायतें], वित्तीय सेवा विभाग (बीमा प्रभाग) [6,429 शिकायतें] और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (आयकर) [5,524 शिकायतें] को अधिकतम शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

पीजी अपील

जनवरी, 2023 में 15,398 अपीलें प्राप्त हुईं और 14,320 अपीलों का निपटारा किया गया। केंद्रीय सचिवालय में जनवरी, 2023 के अंत तक 26,306 पीजी अपील लंबित हैं।

जनवरी, 2023 के अंत तक केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (आयकर) [3,215 अपीलें], कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय [2,076 अपील],  स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग [1,088 अपील] और श्रम और रोजगार मंत्रालय [1137 अपील] में अधिकतम अपीलें लंबित हैं।

शिकायत निवारण सूचकांक

जनवरी, 2023 में समूह ए के अंतर्गत व्यय विभाग और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण शिकायत निवारण सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले हैं।

जनवरी, 2023 में समूह बी अंतर्गत नीति आयोग और वित्तीय सेवा विभाग (पेंशन सुधार) शिकायत निवारण सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले हैं।

लंबित मामले

24 जनवरी, 2023 तक 21 मंत्रालयों/विभागों के पास 1,000 से ज्यादा लंबित मामले हैं।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (आयकर) [7,579 शिकायतें] और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग [1,912 शिकायतें] में 30 दिनों से ज्यादा समय से लंबित शिकायतों की संख्या सबसे अधिक है।

औसत निपटारा समय

जनवरी, 2023 में सभी मंत्रालयों/विभागों में औसत शिकायत निपटारा समय 19 दिन रहा।

बीएसएनएल कॉल सेंटर से प्राप्त फिडबैक

01 जनवरी से 24 जनवरी, 2023 तक, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए बीएसएनएल कॉल सेंटर द्वारा सीधे नागरिकों से प्राप्त हुए फीडबैक में से 6,017 शिकायतों को उत्कृष्ट और बहुत अच्छी की रेटिंग प्राप्त हुई है।

ये रिपोर्ट सीपीजीआरएएमएस की 10-चरणीय सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिन्हें डीएआरपीजी द्वारा निपटारे की गुणवत्ता में सुधार लाने और समय सीमा में कमी लाने के लिए अपनाया गया है। शिकायतों के निपटारे की गुणवत्ता में सुधार और समय सीमा में कमी लाने के लिए 10-चरणीय सीपीजीआरएएमएस सुधार प्रक्रिया अपनाई गई। 10-चरणीय सुधारों में शामिल हैं:

i. सीपीजीआरएएमएस 7.0 का सार्वभौमिकरण- अंतिम मील तक शिकायतों का स्वत: पथ निर्धारण

ii. प्रौद्योगिक संवर्द्धन- एआई/एमएल का फायदा उठाते हुए अत्यावश्यक शिकायतों का स्वत: पता लगाना

iii. भाषा अनुवाद- अंग्रेजी के साथ-साथ 22 अनुसूचित भाषाओं में सीपीजीआरएएमएस पोर्टल

iv. शिकायत निवारण सूचकांक- मंत्रालयों/विभागों का उनके प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग

v. फीडबैक कॉल सेंटर – 50-कर्मचारियों वाला कॉल सेंटर, जिसके माध्यम से शिकायतों का निपटारा होने पर प्रत्येक नागरिक से सीधे फीडबैक प्राप्त किया जाता है

vi. वन नेशन वन पोर्टल- सीपीजीआरएएमएस के साथ राज्य पोर्टल और भारत सरकार के अन्य पोर्टलों का एकीकरण

vii. समावेशिता और आउटरीच- दूरस्थ नागरिक को सीएससी के माध्यम से शिकायतें दर्ज कर उन्हें सशक्त बनाना

viii. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण- एसईवीओटीटीएएम योजना के अंतर्गत आईएसटीएम और राज्य एटीआई द्वारा संचालित, प्रभावी शिकायत समाधान को सक्षम बनाने के लिए

ix. निगरानी प्रक्रिया- केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों दोनों के लिए मासिक रिपोर्ट

x. डेटा रणनीति युनिट- व्यावहारिक डेटा विश्लेषण करने के लिए डीएआरपीजी में स्थापित

डीएआरपीजी ने भविष्य में शिकायतों का निपटारा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग करने वाली अपनी योजनाओं का भी खुलासा किया है। इसके लिए डीएआरपीजी ने आईआईटी कानपुर के साथ एक साझेदारी की है और सभी मंत्रालयों/विभागों के शिकायत अधिकारियों की सुविधा के लिए इंटेलिजेंट ग्रीवांस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड का परिचालन किया है।

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने दिसंबर 2022 में संसद को अपनी 121वीं रिपोर्ट सौंपी, जिसमें विभाग द्वारा लोक शिकायतों का निपटारा करने में जवाबदेही, अपील सुविधा, अनिवार्य कार्रवाई रिपोर्ट, फीडबैक कॉल सेंटर जैसे उठाए गए 10-चरणीय सुधारों की सराहना की गई। इसके अलावा, संसदीय स्थायी समिति ने सभी अनुसूचित भाषाओं में सीपीजीआरएएमएस पोर्टल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीएआरपीजी के प्रयासों की भी सराहना की।

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फर्जी छात्र संख्या के बूते 10 टीचरों की लाखों सैलरी उठा रहा ये मदरसा

*फर्जी छात्र संख्या के बूते 10 टीचरों की लाखों सैलरी उठा रहा ये मदरसा!*

कानपुर 3 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता, संबंधित सरकारी विभागों के ‘सहयोग’ के कारण नई सड़क स्थित मदरसा एहसानुल मदारिस कदीम के भ्रष्टाचार की महिमा अपरम्पार है। इस मदरसे में प्रबंधकों की धांधली का आलम ये है कि स्टूडेंट्स तो कुल पौने दो सौ, यानि पूरे 175 भी भर्ती नहीं हैं, लेकिन मुदर्रिसों या टीचरों की संख्या 10 है। हर एक टीचर की सरकारी सेलरी कम से कम 50 से 60 हजार रूपये है। यानि सरकार मदरसा एहसानुल मदारिस कदीम के 10 टीचरों के लिये ही हर महीने 5 से 6 लाख रूपये वेतन पर खर्च कर रही है। ऊपर से दो-दो चपरासी और प्रिंसिपल हैं। परिषदीय और बोर्ड विद्यालयों की तरह मदरसों में भी 35 से 40 बच्चों पर एक टीचर रखे जाने का प्रावधान है। इस हिसाब से तो मदरसे में कम से कम 400 छात्र होने ही चाहिये। ऐसा नहीं होने पर सरकार को मदरसे पर फिजूल खर्च बंद करने के लिये यहां शिक्षकों के 10 से घटाकर केवल 4 कर देने चाहिये। या कम से कम आधे पद खत्म कर देने चाहिये। लेकिन सूत्रों के अनुसार हो ये रहा है कि मदरसा प्रबंधक मुमताज अहमद सिद्धीकी लगातार कई सालों से अपने शिक्षक पद पूरे 10 बनाये रखने को कागजों पर फर्जी छात्र संख्या दिखा रहे हैं। यानि मदरसा एहसानुल मदारिस कदीम में बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा करके सरकारी धन लूटा जा रहा है। पुष्ट सूत्रों के अनुसार मदरसे में फर्जी छात्र संख्या के अलावा टीचरों की भी फर्जी अटेंडेंस लगती है। 10 में से अधिकतम 4 या 5 शिक्षक ही किसी एक समय पर मदरसे में आते हैं। बाकी की जगह 4 से 6 हजार रूपये में स्थानीय मुदर्रिस बुलाये जाते हैं। जानकारों के अनुसार फर्जीवाड़ा हो पा रहा है जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जानबूझकर की जा रही अनदेखी से, क्योंकि इंस्पेक्शन करके वेतन का और पद सृजन या समाप्ति आदि का अनुमोदन यही कार्यालय करता है।

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भारत का अनाज उत्पादन 2021-22 में रिकॉर्ड 315.7 मिलियन टन तक पहुंचा

केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज 31 जनवरी, 2023 को संसद में ‘आर्थिक समीक्षा 2022-23’ पेश करते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन संबंधी चुनौतियों के बावजूद 2021-22 में भारत में कुल अनाज उत्पादन रिकॉर्ड 315.7 मिलियन टन तक पहुंच गया। इसके अलावा प्रथम अग्रिम अनुमान 2022-23 (केवल खरीद) के अनुसार देश में कुल अनाज उत्पादन का अनुमान 149.9 मिलियन टन है जो पिछले पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21) के औसत खरीद अनाज उत्पादन से बहुत अधिक है। दालों का उत्पादन भी पिछले पांच वर्षों के औसत 23.8 मिलियन टन से बहुत अधिक रहा है।

बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन

आर्थिक समीक्षा में बागवानी को एक उच्च पैदावार वाला क्षेत्र एवं आय के उच्च स्रोत और किसानों के लिए बेहतर साधन के रूप में वर्णन किया है। तीसरे अगिम अनुमान (2021-22) के अनुसार, 28.0 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में 342.3 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ। सरकार ने 55 बागवानी समूहों की पहचान की है, जिनमें से 12 को क्लस्टर विकास कार्यक्रम (सीडीपी) के प्रारंभिक चरण के लिए चुना गया है। यह कार्यक्रम बागवानी समूहों की भौगोलिक विशेषज्ञता का लाभ उठाने और संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला सहित पूर्व-उत्पादन, उत्पादन और कटाई के बाद की गतिविधियों के एकीकृत और बाजार-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है।

पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन

भारतीय कृषि के सबंद्ध क्षेत्र-पशुधन, वानिकी और लॉगिंग और मछली पकड़ने और जलीय कृषि धीरे-धीरे तेजी से विकास के क्षेत्र बन रहे हैं और ये बेहतर कृषि आय के संभावित स्रोत हैं।

पशुधन क्षेत्र 2014-15 से 2020-21 (स्थिर कीमतों पर) के दौरान 7.9 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ा और 2014-15 में कुल कृषि जीवीए (स्थिर कीमतों पर) में इसका योगदान 24.3 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 30.1 प्रतिशत हो गया है। इसी तरह, 2016-17 से मत्स्य पालन क्षेत्र की वार्षिक औसत वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत रही है और कुल कृषि जीवीए में इसकी हिस्सेदारी लगभग 6.7 प्रतिशत है। डेयरी क्षेत्र पशुधन क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, जो सीधे तौर पर आठ करोड़ से अधिक किसानों को रोजगार देता है और सबसे प्रमुख कृषि उत्पाद है। अन्य पशुधन उत्पाद, जैसे अंडे मांस का महत्व भी बढ़ रहा है। जबकि दुनिया में दूध उत्पादन में भारत पहले स्थान पर है, दुनिया में अंडे के उत्पादन में तीसरे और मांस उत्पादन में आठवें स्थान पर है।

संबद्ध क्षेत्रों के महत्व को समझते हुए, सरकार ने बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और पशुधन उत्पादकता और रोग नियंत्रण में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किए हैं। वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत (एएनबी) प्रोत्साहन पैकेज के एक भाग के रूप में, 2020 में 15,000 करोड़ रुपये का पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ) प्रारंभ किया था। कुल 3,731.4 करोड़ की लागत वाली 116 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। जबकि राष्ट्रीय पशुधन मिशन को नस्ल सुधार और उद्यमिता विकास पर जोर देता है। पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना को आर्थिक और जूनोटिक महत्व को पशु रोगों को रोकने और नियंत्रित करने के लिए लागू किया जा रहा है।

भारत सरकार ने 20,050 करोड़ के कुल परिव्यय वाली प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की शुरूआत की। भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना अब तक का सर्वाधिक निवेश है जिसे वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 तक पांच वर्षों में लागू किया जा रहा है ताकि मछुवारों, मत्स्य किसानों और मत्स्य श्रमिकों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करते हुए मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और उत्तरदायी विकास किया जा सके। मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष के तहत 17 अक्टूबर, 2022 तक 4,923.9 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है और मछली पकड़ने और संबद्ध गतिविधियों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के माध्यम से 9.4 लाख से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया है।

खाद्य सुरक्षा

आर्थिक समीक्षा में उल्लेख किया गया है कि भारत में खाद्य प्रबंधन कार्यक्रम में किसानों से लाभकारी कीमतों पर खाद्यान्न की खरीद, उपभोक्ताओं को खाद्यान्न का वितरण, विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों, सस्ती कीमतों पर और खाद्य सुरक्षा और मूल्य स्थिरता के लिए खाद्य बफर स्टॉक का रखरखाव शामिल है। ऐतिहासिक फैसले द्वारा, सरकार ने 1 जनवरी, 2023 से एक वर्ष के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अधीन लगभग 81.4 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न देने का फैसला किया है। गरीबों के वित्तीय बोझ दूर करने के लिए सरकार इस अवधि में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत खाद्य सब्सिडी पर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी। खरीफ विपणन सीजन (केएमएस) 2021-22 के दौरान 532.7 एलएमटी के अनुमानित लक्ष्य के मुकाबले 581.7 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) चावल की खरीद की गई। चालू वर्ष खरीफ विपणन सीजन (केएमएस) 2022-23 में 31 दिसंबर 2022 तक कुल 355 लाख मीट्रिक टन चावल की खरीद की गई है।

कोविड-19 महामारी के कारण हुए आर्थिक व्यवधान के चलते गरीबों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सरकार ने राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को 1118 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित किया है। भोजन तक पहुंचने की प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए सरकार ने 2019 में एक नागरिक-केन्द्रित और प्रौद्योगिकी-संचालित योजना शुरू की। जिसे वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) कहा गया। वन नेशन वन राशन कार्ड प्रणाली राशन कार्डों की अंतर-राज्यीय और अंतर-राज्य सुवाह्यता को सक्षम बनाती है। वर्तमान में सभी 36 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेश राष्ट्रीय/अंतर/राज्यीय पोर्टेबिलिटी सक्षम है, जिसमें कुल एनएफएसए आबादी को शत-प्रतिशत शामिल किया गया है।

मोटा अनाज का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मार्च, 2021 के दौरान अपने 75वें सत्र में 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष (आईवाईएम) घोषित किया। मोटा अनाज उच्च पोषण मूल्य वाला स्मार्ट भोजन है, जो जलवायु के अनुकूल है, और संयुक्त राष्ट्र के कई सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजीएस) के अनुरूप है। आजीविका सृजित करने, किसानों की आय बढ़ाने और पूरी दुनिया में खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी विशाल क्षमता के कारण इनका अत्यधिक महत्व है। भारत बाजरा का 50.9 मिलियन टन (चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार) से अधिक मोटा अनाज का उत्पादन करता है जो एशिया के 80 प्रतिशत और वैश्विक उत्पादन का 20 प्रतिशत है। वैश्विक औसत उपज 1229 किग्रा/हेक्टेयर है, जबकि भारत में उच्च औसत उपज 1239 किग्रा/हेक्टेयर है। भारत में मोटा अनाज मुख्य रूप से खरीफ की फसल है जो ज्यादातर वर्षा आधारित परिस्थितियों में उगाई जाती है जिसमें अन्य मुख्य स्टेपल की तुलना में कम पानी और कृषि आदानों की आवश्यकता होती है।

मोटे अनाज के पोषण मूल्य को देखते हुए सरकार ने अप्रैल 2018 में मोटे अनाज को पोषक-अनाज के रूप में अधिसूचित किया। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएमएस) के तहत बाजरा प्रदान करने के लिए पेश किया गया है। पोषण संबंधी सहायता के लिए मोटा अनाज को शामिल किया। 2018-19 से 14 राज्यों के 212 जिलों में न्यूट्री-अनाज पर सब-मिशन क्रियान्वित किया गया है।

भारत में मोटा अनाज मूल्य वर्धित श्रृंखला में 500 से अधिक स्टार्ट-अप्स काम कर रहे है। उद्योग और कृषि के बीच मजबूत संबंधों और अंत-क्रियाओं को बढ़ावा देने के कारण खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का भारत के विकास में अत्यधिक महत्व है। वित्तीय वर्ष 21 को समाप्त पिछले पांच वर्षों के दौरान, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग क्षेत्र लगभग 8.3 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। 2021-22 के दौरान प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात सहित कृषि-खाद्य निर्यात का मूल्य, भारत के कुल निर्यात का लगभग 10.9 प्रतिशत था।

इस क्षेत्र की प्रचुर क्षमता को पहचानते हुए सरकार देश में खाद्य प्रसंस्करण के विकास के उद्देश्य से विभिन्न हस्तक्षेपों में सबसे आगे रही है। खाद्य प्रसंस्करण उद्यो मंत्रालय, प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (पीएमकेएसवाई) की घटक योजनाओं के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र समग्र विकास और विकास के लिए वित्तीय सहायता देता है। पीएमकेएसवाई के तहत 31 दिसंबर, 2022 तक 677 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। 31 दिसंबर, 2022 तक 1402.6 करोड़ रुपये के 15,095 ऋण संस्वीकृत किए गए। यह योजना साझा सेवाओं और विपणन उत्पादों का उपयोग करके इनपुट की खरीद में बड़े पैमाने पर लाभ उठाने के लिए एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के दृष्टिकोण को अपनाती है। अब तक 35 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में ओडीओपी के तहत 137 विशिष्ट उत्पादों वाले 713 जिलों को मंजूरी दी गई है। मार्च, 2022 में शुरू किए गए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) को वैश्विक खाद्य चैंपियन हेतु निवेश को प्रोत्साहित करने का विशिष्ट माध्यम है। सहायता के लिए उच्च विकास क्षमता वाले क्षेत्र जैसे समुद्री उत्पाद, प्रसंस्कृत फल और सब्जियां, और ‘रेडी टू ईट/रेडी टू कुक’ उत्पाद को शामिल किया गया है।

कृषि अवसरंचना निधि (ओआईएफ)

कृषि अवसंरचना निधि एक वित्त पोषण सुविधा है जो वर्ष 2020-21 से 2032-33 तक की फसल कटाई के बाद के प्रबंधन के बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कृषि संपत्तियों के निर्माण के लिए 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान और क्रेडिट गारंटी समर्थन सहित लाभों के साथ चल रही है। इसके तहत 2020-21 से 2025-26 की अवधि के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और वर्ष 2032-33 तक ब्याज अनुदान और क्रेडिट गारंटी सहायता दी जाएगी। कृषि अवसंरचना निधि योजना में राज्य या केन्द्र सरकार की किसी अन्य योजना के साथ अभिसरण की सुविधा है और यह कृषि क्षेत्र में निवेश की दृष्टि से मील का पत्थर साबित हो सकती है।

इसकी स्थापना के बाद से अब तक देश कृषि बुनियादी ढांचे के लिए 13,681 करोड़ रुपये की राशि संस्वीकृत की गई है, जिसमें 18,133 से अधिक परियोजनाएं शामिल हैं।

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)

भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) योजना शुरू की ताकि किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली तैयार की जा सके। ई-नाम योजना के अधीन, सरकार संबंदित हार्डवेयर के लिए प्रति एपीएमसी मंडी को मुफ्त सॉप्टवेयर और 75 लाख रुपये की सहायता प्रदान करती है, जिसमें गुणवत्ता परख उपकरण और सफाई, ग्रेडिंग, छंटाई, पैकेजिंग, खाद इकाई आदि जैसे बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। 31 दिसंबर, 2022 तक 1.7 करोड़ से अधिक किसान और 2.3 लाख ई-एनएएम पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके है।

देश में विकास और रोजगार के लिए कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऋण वितरण के लिए एक किफायती, समय पर और समावेशी दृष्टिकोण के माध्यम से क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इन सब पहलों से कृषि क्षेत्र में सतत और समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

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एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में महोत्सव के रूप में मनाया गणतंत्र दिवस एवं बसंत पंचमी

कानपुर 27 जनवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता 74 वें गणतंत्र दिवस तथा बसंत पंचमी के अभूतपूर्व संयोग को एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में एक महोत्सव के रूप में मनाया गया।महाविद्यालय की सरस्वती पूजा नगर में सुविख्यात है।
सरस्वती जी की सुंदर प्रतिमा को महाविद्यालय प्रेक्षागृह में स्थापित किया गया।महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो सुमन सचिव पी के सेन अध्यक्ष पी के सेन शुभ्रो सेन तथा कार्यक्रम प्रभारी प्रो. मीनाक्षी व्यास ने माँ की स्थापना कर पुष्पांजलि दी।डॉ. शुभा वाजपई, डॉ. सुनीता शुक्ला, डॉ. प्रीता अवस्थी, डॉ. सारिका अवस्थी के द्वारा बसंत उत्सव की तैयारियां पूर्ण मनोयोग से की गई। डॉ. रचना निगम के निर्देशन में कला विभाग की छात्राओं द्वारा विगत तीन दिनों में कठिन परिश्रम द्वारा महाविद्यालय सभागार में वृहत रंगोली का निर्माण किया गया। महाविद्यालय में बसंत पर्व पर सरस्वती की मूर्ति स्थापना, पूजा तथा विसर्जन की परंपरा का विधिवत् निर्वहन किया गया। इस अवसर पर संपूर्ण महाविद्यालय परिवार प्रो निशी प्रकाश प्रो गार्गी यादव प्रो निशा अग्रवाल प्रो चित्रा सिंह तोमर डा प्रीति सिंह आदि उपस्थित रहे।

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